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नीतू सिंह रेणुका
Authored 'मेरा गगन', 'समुद्र की रेत', 'मन का मनका फेर', 'क्योंकि मैं औरत हूँ?' & 'सात दिन की माँ तथा अन्य कहानियाँ'
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नीतू सिंह रेणुका Oct 17
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नीतू सिंह रेणुका 12 Oct 17
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दिलबर मेरे जब क़रीब से गुज़र जाते हैं। अर्श के सितारे भी फर्श पे उतर आते हैं।।
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नीतू सिंह रेणुका 12 Oct 17
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तुझे सफर के धूप का तकाजा था, तूने साथ चलने की गुजारिश भी की थी। चल न सके साथ, हम दो कदम भी अगरचे हमने चलने की ख्वाहिश भी की थी।।
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नीतू सिंह रेणुका 11 Oct 17
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लबों की लर्ज़िश ने बताया है कि होंठों में कोई राज़ छुपाया है। कह दो कि हमने खुद को बरसों खामोशी की आग में जलाया है।।
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नीतू सिंह रेणुका 11 Oct 17
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नीतू सिंह रेणुका 11 Oct 17
जन्मदिन के ढेरों शुभकामनाएँ सर। मेरा लेख -: अमिताभ : एक पिता की नज़र से
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नीतू सिंह रेणुका 10 Oct 17
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क़ुर्ब-ए-शायरी ने देखो हमें, क्या-क्या न सीखा दिया। ज़ब्त कर के बैठे थे जिस शरार को, उसे ख़ूब हवा दिया।।
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नीतू सिंह रेणुका 9 Oct 17
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हम भी बह निकले हैं इश्क़-ए-सैलाब में। कि अब तो जिंदगी गुज़रेगी इज़्तिराब में।।
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नीतू सिंह रेणुका 9 Oct 17
Replying to @varungrover @kavishala
एक टक देखती हूँ उन बाल्टियों को कि न नफरत ही की तुमने न प्रेम ही किया गया क़रीने से सबकुछ लगा दिया तुमने रेत सजाने- सँवारने के लिए।
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नीतू सिंह रेणुका 8 Oct 17
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मानूस न हुए वो कभी हमारी धड़कनों की आवाज़ से। अगरचे इन धड़कनों को इश्क़ हुआ उनके ही एहसास से।।
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नीतू सिंह रेणुका 7 Oct 17
जहाँ कहीं से भी आप हिंदी की किताबें खरीदते हैं। उस विक्रेता से कहिए, मँगा देगा।
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नीतू सिंह रेणुका 7 Oct 17
Delhi : A Novel :: Khushwant Singh :: Pg 293
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नीतू सिंह रेणुका 6 Oct 17
Replying to @vismehta15 @Rekhta
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नीतू सिंह रेणुका 6 Oct 17
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Till today I thought Uzr means Objection
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नीतू सिंह रेणुका 6 Oct 17
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उज़्र क्या है जीने का, अगर तू नहीं मर भी जाते हम, मगर यूँ नहीं। कि तू नहीं तेरी उम्मीद तो है तो फिर मैं क्यों जियूँ नहीं।।
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नीतू सिंह रेणुका 6 Oct 17
Delhi : A Novel :: Khushwant Singh :: Pg. 267
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नीतू सिंह रेणुका 6 Oct 17
क्या फायदा है भला मर-मर के ऐसे जीने से। कि दर्द ये होता ही नहीं रूखसत मेरे सीने से।।
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नीतू सिंह रेणुका 6 Oct 17
जो वो इधर एक नज़र कर देते। हम नज़र उन्हें ये जिगर कर देते।।
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नीतू सिंह रेणुका 6 Oct 17
हमने देखा है गुलशन बदल-बदल कर। इन साँसों से तेरी खूशबू न गई मगर।।
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नीतू सिंह रेणुका 5 Oct 17
मैं बेवफ़ाई करती भी हूँ अगर तो ख़ुद को ही खफ़ा करती हूँ। मेरी ये वफ़ा आप से नहीं हुज़ूर कि मैं तो ख़ुद से वफ़ा करती हूँ।।
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