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Mrs LaxmanRanawatSolanki Mar 26
💐Very warm regards on the Birthday of the great talent, writer 🙏You had the unique art of displaying ♥️ in words
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UMA ARYA May 1
दीपक चाहे छोटा हो चाहे बड़ा, सूर्य जब अपना आलोकवादी कर्तव्य उसे सौंप कर चुपचाप डूब जाता है तब जल उठना ही उसके अस्तित्व की शपथ है-जल उठना ही उसका जाने वाले को प्रणाम है...
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Antra May 9
साँझ के अन्तिम सुनहले हास सी चुपचाप आकर, मूक चितवन की विभा- तेरी अचानक छू गई भर, बन गई दीपावली तब आँसूओं की पाँत मेरी! अश्रु घन के बन रहे स्मित  सुप्त वसुधा के अधर पर, कंज में साकार होते बीचियों के स्वप्न सुन्दर, मुस्करा दी दामिनी में साँवली बरसात मेरी!
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प्रकाश अव्यक्त 💫 Aug 19
Replying to @avyakta_pc
🍁🍁🍁 हँस उठते पल में आर्द्र नयन धुल जाता होठों से विषाद छा जाता जीवन में बसन्त लुट जाता चिर-संचित विराग! आँखें देतीं सर्वस्व वार! जो तुम आ जाते एक बार!
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तूलिका Mar 26
पथ न भूले, एक पग भी, घर न खोये, लघु विहग भी, स्निग्ध लौ की तूलिका से आँक सबकी छाँह उज्ज्वल दीप मेरे जल अकम्पित घुल अचंचल! -
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कान्हा की मीरा .. Feb 22
किसी जीवन की मीठी याद लुटाता हो मतवाला प्रात, कली अलसायी आँखें खोल सुनाती हो सपने की बात; खोजते हों खोया उन्माद मन्द मलयानिल के उच्छवास, माँगती हो आँसू के बिन्दु मूक फूलों की सोती प्यास; पिला देना धीरे से देव उसे मेरे आँसू सुकुमार सजीले ये आँसू के हार!
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तूलिका Mar 26
चित्रित तू मैं हूँ रेखाक्रम, मधुर राग तू मैं स्वर संगम, तू असीम मैं सीमा का भ्रम, काया छाया में रहस्यमय। प्रेयसि प्रियतम का अभिनय क्या तुम मुझमें प्रिय! फिर परिचय क्या -
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Dr. Shailendra Verma Mar 25
महादेवी वर्मा कहती थी कि ....... अंधकार से सूर्य नहीं दीपक जूझता है- रात के इस सघन अंधेरे में जूझता- सूर्य नहीं, जूझता रहा दीपक! कौन सी रश्मि कब हुई कम्पित, कौन आँधी वहाँ पहुँच पायी? कौन ठहरा सका उसे पल भर, कौन सी फूँक कब बुझा पायी।। 🙏💐
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Shipra Indoria Sep 11
आधुनिक काल की मीरा कही जाने वाली कवयित्री को उनकी पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन 🙏 वेदना और पीड़ा महादेवी जी की कविता के प्राण रहे। उनका समस्त काव्य वेदनामय है। उन्हें निराशावाद अथवा पीड़ावाद की कवयित्री कहा गया है।
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Hindinama Mar 26
भारतीय नारी जिस दिन अपने सम्पूर्ण प्राण-आवेग से जाग सके, उस दिन उसकी गति रोकना किसी के लिए सम्भव नहीं। उसके अधिकारों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि वे भिक्षावृत्ति से न मिले हैं, न मिलेंगे, क्योंकि उनकी स्थिति आदान-प्रदान योग्य वस्तुओं से भिन्न है।
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SHIVANI VERMA Aug 21
कौन बंदी कर मुझे अब बँध गया अपनी विजय में? कौन मेरे हृदय में?
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Aliya Mar 25
Replying to @Aliya2279
मुझ में विक्षिप्त झकोरे! उन्माद मिला दो अपना, हाँ नाच उठे जिसको छू मेरा नन्हा सा सपना!! पीड़ा टकराकर फूटे घूमे विश्राम विकल सा; तम बढे मिटा ड़ाले सब जीवन काँपे दलदल सा।
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Aliya Mar 25
Replying to @Aliya2279
इन बूदों के दर्पण में करुणा क्या झाँक रही है? क्या सागर की धड़कन में लहरें बढ आँक रहीं हैं? पीड़ा मेरे मानस से भीगे पट सी लिपटी है, डूबी सी यह निश्वासें ओठों में आ सिमटीं हैं।
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Aliya Mar 25
Replying to @Aliya2279
फिर भी इस पार न आवे जो मेरा नाविक निर्मम, सपनों से बाँध ड़ुबाना मेरा छोटा सा जीवन! Good morning 🙏🏼 🙏🏼🌷🌷☕☕🌷🌷🙏🏼
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Keshav Prasad Maurya Mar 25
"वे मुस्काते फूल नहीं जिनको आता है मुरझाना l वे तारों के दीप नहीं जिनको भाता है बुझ जाना ll" आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों एवं छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक पद्म विभूषित महान लेखिका जी की पर उन्हें शत शत नमन!
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Hindinama Mar 26
वर्तमान युग के पुरुष ने स्त्री के वास्तविक रूप को कभी न देखा था, न वह उसकी कल्पना कर सका। उसके विचार में स्त्री के परिचय का आदि अंत इससे अधिक और क्या हो सकता था कि वह किसी की पत्नी है। कहना न होगा कि इस धारणा ने ही असंतोष को जन्म देकर पाला और पालती जा रही है। 🙏
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Anju Bala Mar 25
हिंदी साहित्य जगत की प्रख्यात कवयित्री जी को उनकी जयंती पर शत शत नमन !
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Aditi Mar 25
मेह बरसने वाला है मेरी खिड़की में आ जा तितली। बाहर जब पर होंगे गीले, धुल जाएँगे रंग सजीले, झड़ जाएगा फूल, न तुझको बचा सकेगा छोटी तितली, खिड़की में तू आ जा तितली! @SharmaArunDutt
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Dr. Kavita Pania Mar 25
"नीरव नभ के नयनों पर हिलतीं हैं रजनी की अलकें, जाने किसका पंथ देखतीं, बिछ्कर फूलों की पलकें।
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Ashok Mushroof Mar 25
विश्व में हे फूल सबके हृदय भाता रहा दान कर सर्वस्व फिर भी हाय हर्षाता रहा जब ना तेरी ही दशा पर दुःख हुआ संसार को कौन रोयेगा सुमन हमसे मनुज निःसार को ~महादेवी वर्मा (मुरझाया फूल) @gargashu2015
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