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Sadguru Siddharth Aulia
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कैसे जानें कि सम्बोधि उपलब्ध हुई?: सद्गुरु सिद्धार्थ औलिया जी via
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sandeep nain 5h
Oshodhara J&K Maitri Sangh INVITES to WATCH LIVE TELECAST of 78th BIRTHDAY CELEBRATION of SADGURU SIDDHARTH AULIA JI from Jammu India on Wed, 23 Sept. 2020 at 6:30-8:15pm IST YouTube: SiddharthAulia 6:30PM 8:00PM
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Suno Bhai Sadho 3h
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Suno Bhai Sadho 3h
🌹 SADGURU'S SATURDAY SESSION 🌹 Today evening's 's session will be conducted by Sadguru Ji from 7.00-8.15 PM IST. Repeaters may join by contributing ₹500 ($18 for foreigners) only. For booking📞9671400193/6
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Sadguru Siddharth Aulia 2h
🥀आनंद-गीता🥀 खो गया प्रेम का गीत कहीं, खो गया सत्य का राग यहाँ। खो गई कहीं पर राधा है, खो गया कहीं गोपाल यहाँ। हर व्यक्ति यहाँ पर आरत है, कैसे कह दूं यह भारत है! कृष्णत्वं शरणं गच्छामि, भज शरणं गच्छामि।। -सद्गुरु
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Sadguru Siddharth Aulia 2h
🥀आनंद-गीता🥀 भारत केवल हिमगिरि, गंगा, सागर वेस्टित भूखंड नहीं। वह बुद्धों का है संघ कि जिसका कहीं आदि या अंत नहीं। जीसस भी और मोहम्मद भी, सब हैं भारत के वंशज ही। अथ भारत शरणं गच्छामि, भज शरणं गच्छामि।। -सद्गुरु
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Sadguru Siddharth Aulia 2h
🥀आनंद-गीता🥀 तन है दुर्बल मन ईर्ष्यालु, है भारत की तस्वीर यही। शक होता है गौतम, नानक, क्या पैदा हुए कबीर यहीं? हर व्यक्ति यहाँ निंदा में रत, क्या यही कृष्ण का है भारत? कृष्णत्वं शरणं गच्छामि, भज शरणं गच्छामि।। -सद्गुरु
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🥀आनंद-गीता🥀 कब जाति - बंध सब टूटेंगे, कब गीत अमन के फूटेंगे? कब भारत होगा शीलवान, हर नारी सीता, पुरुष राम? सब मानेंगे सबको अपना, कब पूरा होगा यह सपना? अथ शीलं शरणं गच्छामि, भजी शरणं गच्छामि।। -सद्गुरु
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🥀आनंद-गीता🥀 भारत ने खोजा परम सत्य, पश्चिम ने ऊर्जा को माना। आओ हम दोनों को जानें, नूतन मनुष्य का हो आना। भीतर जाकर हों आत्मवान, बाहर भी हों ऐश्वर्यवान। ऐश्वर्यं शरणं गच्छामि, भज शरणं गच्छामि।। -सद्गुरु
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अध्यात्म का सार है साक्षी। श्वास-प्रश्वास के साक्षी रहो। ब्रह्म और आत्मा के साक्षी रहो। संसार और अंतर्आकाश के साक्षी रहो। भक्ति और ज्ञान के साक्षी रहो। बस साक्षी रहो। - सद्गुरु
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प्रेम उपनिषद् : यह प्रेम कहीं बनकर किसान, खेतों में फसल उगाता है; भोजन का करता इंतजाम, पर खुद भूखा रह जाता है। हर खेत कहे राधे-राधे, बोले किसान राधे-राधे। - सद्गुरु
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संसारी संसार में उलझ जाता है भक्त भगवान में उलझ जाता है, संत कहीं नहीं उलझता। उसकी जिंदगी सुलझी होती है। उसके लिए संसार और भगवान का भेद मिट जाता है। वह अद्वैतं में जीता है, संतुलन में जीता है। क्या बाहर क्या भीतर, वह सदा मस्त रहता है। -सद्गुरु
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ओशो के कुछ कट्टर फ़ॉलोअर्स अपनी सस्ती लोकप्रियता के लिए दावा कर रहे हैं कि उन्हें का संदेश मिला है कि ब्रह्मनाद ध्यान करने या ब्रह्मनाद सुनने से करोना से बचा या मुक्त हुआ जा सकता है। ऐसा कर न केवल वे भ्रम फैला रहे हैं, बल्कि ओशो के नाम को भी बदनाम कर रहे हैं।
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विश्व में महामारी पहले भी आती थी, लेकिन किसी गांव या इलाक़े तक सीमित रहती थी। किंतु आज की तेज रफ्तार जिंदगी ने बार-बार करोना जैसी वैश्विक महामारियों का ख़तरा पैदा कर दिया है। सभी देशों को मिलकर इसके समाधान के लिए स्थाई तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
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गुरू हमारी सीमा नहीं है, हमारी सम्भावना है। वह हमारी मंज़िल नहीं, मील का पत्थर है। गुरु हमारा उद्गम है, हमारा अंत नहीं। गुरु का शब्द संकेत है, बंधन नहीं। गुरू की वाणी सत्य की सुगंध है, सिद्धांत की दुर्गंध नहीं। गुरू हमारी गंगोत्री है, गंगा सागर नहीं। -सद्गुरू
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कुछ लोग के नाम पर कट्टरता फैला रहे हैं। निगुरा संस्कृति का पोषण कर रहे हैं। ध्यान के नाम पर नासिका या नाभि दर्शन करा रहे हैं। साक्षी के नाम पर तटस्थता सिखा रहे हैं। ऐसे लोग ओशो के कार्य को भारी नुक़सान पहुँचा रहे हैं। चीनी सामानों की तरह इनका भी बहिष्कार होना चाहिए। -सद्गुरू
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Sadguru Siddharth Aulia 2h
कभी बुद्ध के संघ में शामिल होना जितनी बड़ी धन्यता थी, आज वैसी ही धन्यता ओशोधारा संघ में शामिल होना है। अंतर केवल इतना है कि बुद्ध का संघ जीवन के निषेध पर खड़ा था। ओशोधारा संघ जीवन के परम स्वीकार पर आधारित है। इस महान संघ में सभी सच्चे और निष्ठावान साधकों का स्वागत है। -सद्गुरू
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Sadguru Siddharth Aulia 2h
Most of the meditators are stuck with the primary techniques like , , etc. Actual inner journey is awakening towards inner space leading to Enlightenment. Visit -Sadguru
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Sadguru Siddharth Aulia 2h
Elixir of Spirituality is for gods, not for demons. It is meant for seekers, not for jokers. It is for sincere disciples, not for casual onlookers. It is for lovers, not for traitors. is of the seekers, by the seekers and for the seekers. -Sadguru
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Sadguru Siddharth Aulia 2h
Silence is within, turbulence is outside. Wisdom is within, logic is outside. Bliss is within, pleasure is outside. Treasure is within, wealth is outside. Love is within, relationship is outside. Seek within, roam outside. -Sadguru
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