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Shivam Srivastava
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Rasmi Ranjan Mohanty 15h
सरकार ने निजीकरण का शानदार फैसला लिया है, अगर इससे भी पैसे कम पड़ जाएं तो बैंकर्स की एक एक किडनी भी बेच देना।
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BaNker A CORONA Warrior@SeemA sinGH 15h
Public sector banks are welfare oriented. Their policies are designed in a way that best suits the vulnerable section of society. Where as Pvt banks are profit driven and their policies are designed to make profit from every single penny deposited.
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निर्जीव बैंकर 15h
कोई और कर रहा। सरकार द्वारा ये धोका सिर्फ कर्मचारी को नहीं जाने कितने परिवारों को दिया जा रहा है।
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Shivam Srivastava Jun 27
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निर्जीव बैंकर Jun 27
सरकारी नौकर हैं गुलाम थोड़ी है बिना बात के गाली खाए बेजुबान थोड़ी हैं
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Shivam Srivastava Jun 26
बैंकर की दशा, दरबे में बंद मुर्गो के समान है। वहीं मुर्गा चिल्लाता है जिसे कसाई काटने को बाहर निकालता है। बाकी साथी पहले की भांति ही दाना चुगने में व्यस्त व मस्त हो जाते हैं
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निर्जीव बैंकर Jun 4
मै आज सुबह बैंक गया, बहुत ही सज्जन लोग थे, बहुत अवभगत किया मुझे पानी चाय के लिए पूछा फिर मैंने बताया मुझे A/C खुलवाना है तो उन्होने सारे कागज भरवा कर अँगूठा लगवा लिया ओर पैसे जमा करने के लिए बोले तो मैंने अपनी बचत से इकट्ठे किए 500 रुपये उन्हे दिए तो वो झल्ला गए ओर बोले 10k लाओ
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Shivam Srivastava Jun 5
एक गरीब किसान फटी हुई चप्पल पहनकर, कभी प्राइवेट बैंक के अंदर घुसने की हिम्मत नहीं करता है। लेकिन सरकारी बैंकों में बैलेंस कि जानकारी भी सीधा मैनेजर के केबिन में जाकर पूछता है।
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Shivam Srivastava Jun 2
यदि कर्मी हित की बात करना या उठाना गलती है तो ये गलती बार बार होती रहेगी
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निर्जीव बैंकर May 30
हम अज़ाद देश के गुलाम नोकर हैं, ऐसा नहीं है कि हम हमेशा से गुलाम थे, हम गुलाम बने जब यूनियन मै चाटुकार नेता आए, हम गुलाम बने जब के अलावा हमारे कयी बाप आकर आदेश देने लगे, हम गुलाम बने जब हमारे साथी की शहीदी को उन्होंने Corona कैरियर कहा
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Shivam Srivastava May 28
बैंक में उम्मीदों का गला घुटते देखा है मैंने हर बैंकर को खून के आंसू पीते देखा है मैंने कभी कस्टमर की गालियां तो कभी प्रबंधन की मार देर रात तक बैंकर को बैंक में मरते देखा है मैंने ये नौकरी बस दूर के ढोल सुहावने जैसी है कम पगार पे सुखी रोटी और हैंडपंप का पानी पीते देखा है मैंने।
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Narendra Godara May 25
स्पॉन्सर बैंक के कार्मिक को इस लॉक डाउन में कन्वेंस के लिए 200 और उसी के ग्रामीण बैंक को 120. हम वाले क्या बैलगाड़ी से चलते है
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अनुतोष देब May 25
मतलब जब होने वाले ससुर के ज्ञान को कॉपरेटिव बैंक से शुरू करते, फिर RRB रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड से होते हुए प्रायोजक बैंक के झरोखे से छोटी रोशनी दिखाते हुए rbi एक्ट 1934 के schedule 2 के पश्चात कथा का समापन किया जाता है।।
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Shivam Srivastava May 25
समान कार्य समान सुविधा
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Shivam Srivastava May 25
देश हित मे समर्पित प्रायोजक बैंक द्वारा उपेक्षित देता अपनेपन का एहसास प्रायोजक बैंक को नही आता रास समान कार्य समान वेतनमान नही मिलती सुविधा ,न मिलता मानसम्मान UFBU के अंग नही हमारे कोई संग नही हम ग्रामीण बैंकर उपेक्षित बैंकर
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Shivam Srivastava May 25
Replying to @SaranshSrv
मेहनती तो है ही हम कुछ भी कर गुजरने का जज्बा रखते है
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