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Rajkamal Prakashan
किताबें जो बदलती हैं ज़िन्दगी उनका पता [हिन्दी का सबसे बड़ा प्रकाशन समूह📚]
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Rajkamal Prakashan 7h
पानी का रेला एक बार गुजरता है तो जाने कितना पीछे ले जाकर छोड़ देता है। और फिर से उम्मीदों की नाव पर सवार हम रास्ता बनाते चल पड़ते हैं। पढ़िए अरुण प्रकाश की कहानी जल प्रांतर-
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markmybook 11h
हर कवि के गद्य में एक विशेष यति-गति होती है , प्रमाण है इस बात का कि स्त्री-कवि के गद्य में रुक-रुककर मुहल्ले की हर टहनी के फूल लोढ़ते चली जानेवाली कस्बाई औरतों की चाल का एक विशेष छंद होता है।  . स्टोरफ्रंट से प्राप्त करें,
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prabhat ranjan 10h
आज लोकमत न्यूज़ में ‘पालतू बोहेमियन’ की चर्चा Prabhat Ranjan Paalatu Bohemian Manohar Shyam Joshi Ki Smriti Katha Review | पालतू बोहेमियन: प्रख्यात साहित्यकार मनोहर श्याम जोशी की स्मृति शेष, खट्टी-मीठी यादों को पिरोया... | Lokmat News Hindi
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sujata 12h
दर्द में दोनों और दोनों अनजान एक दूसरे के संघर्ष से... मिलकर भी अनजान रह जाने वाली दो औरतों की समानान्तर चलती कहानी, जो मिल जाएं तो हो एक बटा दो पूरा ।
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Alind Maheshwari Jul 20
'बरसात आ ही गई। अच्छा है, कुछ बरस जाए। बड़ी भीषण गर्मी है।' ~हरिशंकर परसाई
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Rajkamal Prakashan Jul 20
पढ़िए किंडल पर अपनी पसंदीदा किताबें की किताबें आप पर इस लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं :
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Nitin bhatia Jul 18
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Satyanand Nirupam Jul 18
Day 9: विनोद कुमार शुक्ल का उपन्यास--नौकर की कमीज। & की पहल। न अपेक्षा, न समीक्षा, केवल
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Sudhanshu Upadhyay Jul 19
इसमें फूल भी है शूल भी,धूल भी है, गुलाब भी है, कीचड़ भी है, चन्दन भी, सुन्दरता भी है, कुरूपता भी- मैं किसी से दामन बचाकर निकल नही पाया।❤️
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Kalam_Rajasthan Jul 19
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markmybook Jul 19
....तीस को टच करती, सहज-सी, छुपी-सी, आसान-सी उम्र।अपना पैसा थोड़ा कमा लिया है, तो पूरी आज़ादी लगती हैं- घूमने की, पहनने की, बोलने की, फ़िरने की। - अनुराधा बेनीवाल . 'आज़ादी मेरा ब्रांड' . स्टोरफ्रंट से प्राप्त करें,
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Gaurav Solanki Jul 18
This is one of my most favorite scenes from the script. What is yours?
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Alind Maheshwari Jul 19
देखो भी, पढ़ो भी क्योंकि ज़रूरी है समझना!
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Rajkamal Prakashan Jul 18
राजकमल प्रकाशन समूह के युवा निदेशक अलिंद माहेश्वरी इस बातचीत में बता रहे हैं कि कैसे इन महान लेखकों की उपस्थिति ने उनके जीवन को शुरू बचपन से ही समृद्ध किया है. ⁩ ⁦
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Satyanand Nirupam Jul 18
Day 8: प्रेमचंद का कालजयी उपन्यास 'गोदान'। मेरे पास उपलब्ध संस्करण के आवरण पर यामिनी राय का 'गाय' शीर्षक चित्र। किताब भी पसंद, यह कवर भी मुझे पसंद! & की पहल। न अपेक्षा, न समीक्षा, केवल
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Rajkamal Prakashan Jul 18
“बहुत टुच्ची ज़रूरतों के बदले छीना गया हमसे इतना सारा सब कुछ किसी से कहें तो कहेगा कि व्यर्थ ही भावुक हो रहे हो तुम इसमें ऐसा खास कुछ भी नहीं जगहों से प्यार करने का रिवाज़ तो खत्म हो चुका कब का” दो पंक्तियों के बीच / राजेश जोशी
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Rajkamal Prakashan Jul 18
“राजेश जोशी आज की कविता के उन थोड़े से महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षरों में हैं, जिनसे समकालीन कविता की पहचान बनी है. आज उनके जन्मदिन पर उनके काव्य संकलन 'जिद' से चुनी हुई कविताएं.” Via : ⁦
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Rajkamal Prakashan Jul 18
"कर डालो कर डालो जैसे करना हो नष्ट इस दुनिया को मैं वहीं उगाऊँगा हरी सब्जियां और तन्दूर लगाऊँगा देखना एक रात मैं सचमुच उड़ जाऊँगा।" राजेश जोशी के जन्मदिन पर शुभकामनाएँ 🌸
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Rajkamal Prakashan Jul 18
"देख चिड़िया आजू-बाजू देख ऊपर-नीचे देख बाज़ार से आते उस हाथ को देख जो पिंजरा लाता है। देख उस हाथ को गौर से जो चावल के उजले दानों के नीचे जाल बिछाता है।" -राजेश जोशी (प्रतिनिधि कविताएँ) किताब :
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Alind Maheshwari Jul 17
राजेश जोशी जी की आवाज़ में उनकी 'इत्यादि' इत्यादि हर जगह शामिल थे पर उनके नाम कहीं भी शामिल नहीं हो पाते थे इत्यादि बस कुछ सिरफिरे कवियों की कविता में अक्सर दिख जाते थे। ~राजेश जोशी
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