Shivraj Singh Chouhan Jun 8
‘‘मैं केवल देह नहीं मैं जंगल का पुश्तैनी दावेदार हूँ पुश्तें और उनके दावे मरते नहीं मैं भी मर नहीं सकता मुझे कोई भी जंगलों से बेदखल नहीं कर सकता उलगुलान! उलगुलान! उलगुलान!’’-हरिराम मीणा महान क्रांतिकारी, आदिवासियों के भगवान के बल