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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز)
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) 22h
सूरज का अनुमान है कि कुम्हारपाड़ा के लगभग 120 परिवारों में से लगभग 90 परिवार बर्तन और अन्य वस्तुएं बनाकर अपनी आय कमाते हैं, जबकि बाक़ी लोग खेतिहर मज़दूरी, सरकारी नौकरी और अन्य आजीविका की ओर चले गए हैं। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Aug 11
“यह देश हमारा नहीं है,” सुरेश ने कहा। “इसलिए बाक़ी चीज़ें [हमारे नियंत्रण में] कैसे हो सकती हैं?” via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Aug 10
लॉकडाउन ने एक विधवा कुनी के लिए सब कुछ अनिश्चित कर दिया, जिन्होंने पहली बार ईंट भट्टे पर काम करना शुरू किया था। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Aug 7
‘उलटे प्रवास’ पर ज़रूर चर्चा कीजिए। लेकिन यह भी पूछिए कि उन्होंने अपने गांवों को आख़िर क्यों छोड़ा था। हर कोई बड़े शहर के लिए छोटे गांव को नहीं छोड़ रहा है। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Aug 4
इस साल लगभग 80 लाख क्विंटल कपास की बिक्री नहीं हुई है, जो महाराष्ट्र में 2019-20 के अनुमानित उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है। इसकी क़ीमत अगर 5,500 रुपये के एमएसपी के हिसाब से लगाई जाए, तो 4,400 करोड़ रुपये होगी। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Aug 3
देवी बताती हैं कि उनका पति, जो बहुत ज़्यादा शराब पीता है, शराब की दुकानें खुलने के बाद से हर रात को उनके साथ लड़ता है। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 29
मेरे पड़ोस में मज़दूर का चेहरा बदल गया है, लेकिन उसका दुःख कम नहीं हुआ है। यह आज भी वैसा ही है जैसा 20 साल पहले था। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 29
مارچ میں فصل کی کٹائی کے آس پاس منعقد ہونے والا یہ پروگرام روایتی بیجوں کی نمائش اور ان کا لین دین کرنے، کھوئی قسموں کو دوبارہ حاصل کرنے اور کھیتی کے طور طریقوں پر بات کرنے کا موقع ہوتا ہے۔ via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 29
“बिल्ली का मांस सांस की घरघराहट के लिए अच्छा है, गिलहरी का मांस आवाज़ के लिए अच्छा है, सर्दी के लिए केकड़े अच्छे हैं। इसीलिए हमारे लोग अक्सर बीमार नहीं पड़ते।” via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) retweeted
PARINetworkUrdu Jul 25
’’۱۲ یا ۱۳ سال کی عمر میں [حیض شروع ہوتے ہی] میری شادی ہو گئی تھی۔ پہلے پانچ سال تک میں حاملہ نہیں ہو پائی،‘‘ بیبا بائی بتاتی ہیں، جنہیں اسکول جانے کا کبھی موقع ہی نہیں ملا۔ via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 25
“12 या 13 साल की उम्र में [मासिक धर्म शुरू होते ही] मेरी शादी हो गई थी। पहले पांच साल तक मैं गर्भ धारण नहीं कर पाई,” बिबाबाई बताती हैं, जिन्हें स्कूल जाने का कभी मौक़ा ही नहीं मिला। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 23
’’کبھی کبھی مالن کو پانچ یا چھ مہینے تک حیض نہیں آتا تھا، اور میں [حمل ٹھہرنے کے خوف سے] بیحد فکرمند ہو جاتی تھی۔ وہ زیادہ بولتی نہیں ہے۔ اگر کچھ ہو جاتا، تو مجھے کیسے پتہ چلتا؟‘‘ via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 22
दूध का उपभोग केवल घरों में ही कम नहीं हुआ है, बल्कि होटलों, भोजनालयों और मिठाई की दुकानों के बंद हो जाने से भी डेयरी उत्पादों की मांग में और गिरावट आई है। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 20
गीता को पेट का कैंसर है। लगभग दो सप्ताह पहले, वह और सतेंद्र मध्य मुंबई के परेल इलाक़े में स्थित परोपकारी टाटा अस्पताल के पास फ़ुटपाथ पर वापस चले गए थे। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 17
क्या मैं उनकी फ़ोटो खींचूं? क्या मैं उनसे गाने के लिए कहूं? नहीं, मैं कवि नहीं हूं मैं गाना नहीं लिख सकता। मैं एक फ़ोटोग्राफ़र हूं via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 16
“सब कुछ ठीक होते ही मुझे मुंबई लौटना होगा। अधिकांश प्रवासी मज़दूर शहरों में इसलिए आते हैं क्योंकि अपने गांवों में उनके पास कोई विकल्प नहीं होता है। इसलिए नहीं कि वे शहरों में रहना पसंद करते हैं।” via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 15
आज, वह 99 वर्ष के हो चुके हैं (15 जुलाई, 2020), लेकिन उस आग और भावना को बरक़रार रखे हुए हैं जिसने उन्हें स्वतंत्रता सेनानी, भूमिगत क्रांतिकारी, लेखक, वक्ता और प्रजातंत्रवादी बुद्धिजीवी बनाया। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 14
अरुण पासवान और कामेश्वर यादव को घर पहुंचने के लिए लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी, जबकि अमरित मांझी 2,380 किलोमीटर दूर, तमिलनाडु में फंसे हुए हैं via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 13
उनके लिए राशन की दुकान तक चक्कर लगाना केवल लॉकडाउन के कारण नहीं है। “वे (दुकानदार) मुझे छह साल से राशन नहीं दे रहे हैं,” उन्होंने बताया। वह उम्मीद कर रही थीं कि कम से कम लॉकडाउन के दौरान वे नर्मी दिखाएंगे। via
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Dr. M.Q. Tabrez (ڈاکٹر قمر تبریز) Jul 12
‘घर पर रहें?’ कितने लोगों के पास अपना घर है? इतने किलोमीटर चलने के बाद, कुछ की रास्ते में ही मौत हो गई। वे पैर, वे बच्चे, मैंने जब इन तस्वीरों को देखा, तो मैं इस दर्द, इस पीड़ा को व्यक्त करना चाहता था। via
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